उर्दू शायरी · ग़ज़ल

alam-ba-dast kahin aaina-ba-kaf hun main

अलम-ब-दस्त कहीं आइना-ब-कफ़ हूँ मैं

علم بدست کہیں آئنہ بکف ہوں میں

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अलम-ब-दस्त कहीं आइना-ब-कफ़ हूँ मैं
तिरे ख़िलाफ़ हर इक सम्त सफ़-ब-सफ़ हूँ मैं

मुझे तलाश न कर तू कि इक ज़माना हुआ
किताब-ए-'इश्क़ के हर बाब से हज़फ़ हूँ मैं

हज़ार भेस बदलता रहूँ मगर इस पार
किसी चमकती हुई आँख का हदफ़ हूँ मैं

बदलता रहता हूँ हर लम्हा अपने ख़द-ओ-ख़ाल
कहीं गुहर कहीं दरिया कहीं सदफ़ हूँ मैं

डटा हुआ हूँ अभी तक महाज़ पर 'शहज़ाद'
अगरचे हारे हुए शाह की तरफ़ हूँ मैं