उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaina-KHana-e-guman ko chhoD

आइना-ख़ाना-ए-गुमान को छोड़

آئنہ خانۂ گمان کو چھوڑ

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आइना-ख़ाना-ए-गुमान को छोड़
तू मिरे ज़िक्र मेरे ध्यान को छोड़

ख़िल्क़त-ए-शहर झूट बोलती है
ख़िल्क़त-ए-शहर के बयान को छोड़

रंज मत कर अलाव बुझने का
ज़ख़्म-दर-ज़ख़्म दास्तान को छोड़

इस ज़मीं पर गुलाब-ए-वस्ल खिला
बाँझ मिट्टी के आसमान को छोड़

शाम होने से पेशतर 'शहज़ाद'
तू भी इस जिस्म के मकान को छोड़