उर्दू शायरी · ग़ज़ल

waise to be-shumar hain qamat-kashida log

वैसे तो बे-शुमार हैं क़ामत-कशीदा लोग

ویسے تو بے شمار ہیں قامت کشیدہ لوگ

शायर: Yaqoob Parwaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वैसे तो बे-शुमार हैं क़ामत-कशीदा लोग
गिनती हुई तो रह गए बस चीदा चीदा लोग

दस्तार के हुसूल का कोई तो हो जवाज़
किस ज़ो'म में हैं मुब्तला ये सर-बुरीदा लोग

ऐ काश अपनी मौत ही मरते तो था मज़ा
जाँ से गुज़र गए हैं जो मर्दुम-गज़ीदा लोग

कोई तो पुश्ती-बान है उन का यहीं कहीं
कब बैठते हैं चैन से दामन-दरीदा लोग

खींचेगी तूल कब तलक मोहलत मिली हुई
फ़िरऔन बन गए हैं तिरे आफ़रीदा लोग

'पर्वाज़' जिन की दीद को आँखें तरस गईं
लाएँ कहाँ से ढूँड के ऐसे चुनीदा लोग