उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is tarah murjha gae kuchh phul-chehre raat ko

इस तरह मुरझा गए कुछ फूल-चेहरे रात को

اس طرح مرجھا گئے کچھ پھول چہرے رات کو

शायर: Yaqoob Parwaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस तरह मुरझा गए कुछ फूल-चेहरे रात को
धूप आँगन में उतर आई हो जैसे रात को

उम्र भर सूरज भी जिन की दीद से क़ासिर रहे
उन हया-दारों के उठते हैं जनाज़े रात को

ज़ीस्त का सरमाया है यादें उन्ही लम्हात की
माओं से जब लोरियाँ सुनते थे बच्चे रात को

बन गए हैं रहज़नों के वास्ते जा-ए-अमाँ
और मुसाफ़िर के लिए हैं मौत रस्ते रात को

इस तरह अब तो गुज़रती है मिरी उम्र-ए-रवाँ
खाँसते हैं जिस तरह परवाज़ बूढे रात को