उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ke luTne pe kya kare koi

दिल के लुटने पे क्या करे कोई

دل کے لٹنے پہ کیا کرے کوئی

शायर: Yaqoob Parwaz9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल के लुटने पे क्या करे कोई
किस से जा कर पता करे कोई

सोचता हूँ कि किस भरोसे पर
जान तुम पर फ़िदा करे कोई

या'नी उम्र-ए-ख़िज़र तो हासिल हो
चंद साँसों का क्या करे कोई

एक ही तो सदा-ए-मजनूँ है
मेरे दुख की दवा करे कोई

उस पे लाज़िम उसी का हो जाना
जिस को कुछ भी अता करे कोई

कोई रस्ता निकल ही आता है
इक ज़रा आसरा करे कोई

गाह चलती ब-गाह रुकती है
ऐसी धड़कन का क्या करे कोई

जूँ फ़रिश्ता अजल का आता है
ऐसे वादा-वफ़ा करे कोई

सख़्त मुश्किल है फ़िल-बदीह कहना
छेद हीरे में क्या करे कोई