उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main tera hi aaina hun aur bas

मैं तिरा ही आइना हूँ और बस

میں ترا ہی آئنہ ہوں اور بس

शायर: Yaqoob Parwaz8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं तिरा ही आइना हूँ और बस
तुझ को देखा चाहता हूँ और बस

क्यूँ समझते हो मुझे मंज़िल-नुमा
टेढ़ा-मेढ़ा रास्ता हूँ और बस

है अभी महदूद मेरी आगही
मैं तो इतना जानता हूँ और बस

कोई तो खोले मिरी पेचीदगी
मैं किसी का ज़ाइचा हूँ और बस

अब किसी तरमीम का मत सोचना
मैं मुकम्मल फ़ैसला हूँ और बस

ढूँढना मुझ को कोई मुश्किल नहीं
भीड़ में खोया हुआ हूँ और बस

किस जगह और कब बरसना है मुझे
मैं तो इक उमडी घटा हूँ और बस

लाख हूँ परवाज़ पुर-असरार मैं
ख़ुद ही अपना तर्जुमा हूँ और बस