उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahshaton mein ishq ki wo shana farmaenge kya

वहशतों में 'इश्क़ की वो शाना फ़रमाएँगे क्या

وحشتوں میں عشق کی وہ شانہ فرمائیں گے کیا

शायर: Jalee Amrohvi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वहशतों में 'इश्क़ की वो शाना फ़रमाएँगे क्या
ज़िंदगी उलझी हुई है बाल सुलझाएँगे क्या

ख़ुद ही तुम सोचो जो दुनिया में असीर-ए-ज़ात हैं
वो दुखों की भीड़ में आराम पहुँचाएँगे क्या

दौर-ए-इस्तिब्दाद में ऐ दिल फ़ुग़ाँ बे-सूद है
गर्मी-ए-फ़रियाद से पत्थर पिघल जाएँगे क्या

सोने चाँदनी की ये नहरें ये फ़लक-पैमा महल
बा'द मरने के तिरे महशर में काम आएँगे क्या

हम ने सदियों का चमन छोड़ा वफ़ा की आस पर
अब तुम्हारे देस में भी ठोकरें खाएँगे क्या

ताक़त-ए-ज़ब्त-ओ-तहम्मुल कब की रुख़्सत हो चुकी
ना-तवान-ए-इश्क़ को वो और तड़पाएँगे क्या

ऐ शुआ'-ए-मेहर-ए-ताबाँ जल्वा-रेज़ी से तिरी
संग-रेज़े राह के अल्मास बन जाएँगे क्या

जो मुसलसल 'अस्र-ए-नौ से बरसर-ए-पैकार हैं
वो भी थक कर वक़्त के साँचे में ढल जाएँगे क्या