उर्दू शायरी · ग़ज़ल

donon aalam se ayan tha mujhe malum na tha

दोनों आलम से अयाँ था मुझे मा'लूम न था

دونوں عالم سے عیاں تھا مجھے معلوم نہ تھا

शायर: Jalee Amrohvi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दोनों आलम से अयाँ था मुझे मा'लूम न था
तू ही तो जल्वा-कुनाँ था मुझे मा'लूम न था

क़ल्ब-ए-मुज़्तर में मिरे मेहर-ओ-वफ़ा की सूरत
नूर का एक जहाँ था मुझे मा'लूम न था

दर्द-ए-कौनैन उठा रक्खा था अल्लाह अल्लाह
दिल मिरा कितना जवाँ था मुझे मा'लूम न था

तू मिरी महफ़िल-ए-अफ़्कार सजाने के लिए
रूह में नूर फ़शाँ था मुझे मा'लूम न था

ज़ीनत-ए-फ़र्श रहा या सर-ए-क़ौसैन रहा
तेरा महबूब कहाँ था मुझे मा'लूम न था

जो बहा फ़र्त-ए-नदामत से हुज़ूरी में तिरी
कितना वो अश्क गराँ था मुझे मा'लूम न था

लाला-ओ-गुल में फ़ज़ाओं में मह-ओ-अंजुम में
तेरा ही नूर निहाँ था मुझे मा'लूम न था

बाग़-ए-हस्ती में जला मेरा वजूद-ए-हस्ती
सूरत-ए-फ़स्ल-ए-ख़िज़ाँ था मुझे मा'लूम न था