उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil hai wabasta mera hasrat-e-nakaam ke sath

दिल है वाबस्ता मिरा हसरत-ए-नाकाम के साथ

دل ہے وابستہ مرا حسرت ناکام کے ساتھ

शायर: Jalee Amrohvi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल है वाबस्ता मिरा हसरत-ए-नाकाम के साथ
ताज़ा हो जाते हैं सब ज़ख़्म तिरे नाम के साथ

उस ने हर हलक़-ए-तमन्ना पे चलाया ख़ंजर
यूँ है पैकार मिरी गर्दिश-ए-अय्याम के साथ

दर्द-ए-उल्फ़त मिरा करता है तरन्नुम-रेज़ी
किरनें रो रो के गले मिलती हैं जब शाम के साथ

संग बन जाता अगर मैं भी बरा-ए-इशरत
ज़िंदगी फिर तो गुज़रती बड़े आराम के साथ

हर जिहत से रहा दुनिया में सरासर नाकाम
जी रहा हूँ मैं ख़ुशी से इसी इल्ज़ाम के साथ

राही-ए-ज़ीस्त अगर अज़्म-ए-सफ़र है पुर-जोश
फिर तो वाबस्ता है मंज़िल तिरे हर गाम के साथ

ये बना देता है इंसाँ को मुकम्मल पत्थर
यूँ रही दहर में नफ़रत मुझे आराम के साथ

आतिश-ए-ग़म ने तपा कर किया कुंदन मुझ को
इसी बाइ'स तो 'जली' इश्क़ है आलाम के साथ