उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahi swad-e-haram hai wahi hain but-KHane

वही स्वाद-ए-हरम है वही हैं बुत-ख़ाने

وہی سواد حرم ہے وہی ہیں بت خانے

शायर: Badr Jamali6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वही स्वाद-ए-हरम है वही हैं बुत-ख़ाने
सुनाए जाते हैं उनवाँ बदल के अफ़्साने

हँसी ख़ुद अपनी उड़ा ले रहे हैं दीवाने
जुनूँ की कौन सी मंज़िल है ये ख़ुदा जाने

मआल-ए-शौक़ से अहल-ए-वफ़ा को क्या मतलब
ब-जब्र-ए-इश्क़ खिंचे आ रहे हैं परवाने

वो जाँ-सिपारी-ए-परवाना दिल-गुदाज़ी-ए-शम्अ'
हैं शब को तल्ख़ हक़ाएक़ सहर को अफ़्साने

ग़ुरूर-ए-हुस्न-ए-नज़र से मुझे गिरा न सका
वफ़ा की कौन सी मंज़िल है ये ख़ुदा जाने

जबीं के साथ 'जमाली' का दिल भी झुकता है
कशिश सी हुस्न-ए-बुताँ में है क्या ख़ुदा जाने