उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wachan mujhse kar ke wafa ke chale wo

वचन मुझ से कर के वफ़ा के चले वो

وچن مجھ سے کر کے وفا کے چلے وہ

शायर: Maaz Muaviya5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वचन मुझ से कर के वफ़ा के चले वो
दिए सब ही रौशन बुझा के चले वो

जो ग़फ़लत में देखे मोहब्बत के सपने
हक़ीक़त में सपने दिखा के चले वो

मदीने में जन्नत है जन्नत में आक़ा
'अक़ीदत से पलकें झुका के चले वो

सियासी नशे में है कुर्सी का चस्का
जो आए वतन को ही खा के चले वो

उसे मेरे हम-राह चलना है गर तो
अना को फिर अपनी मिटा के चले वो