उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat ka naghma sunana hai tumko

मोहब्बत का नग़्मा सुनाना है तुम को

محبت کا نغمہ سنانا ہے تم کو

शायर: Maaz Muaviya5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत का नग़्मा सुनाना है तुम को
मोहब्बत है क्या ये बताना है तुम को

मोहब्बत नहीं काम की चीज़ प्यारे
मोहब्बत में सब कुछ लुटाना है तुम को

वो दिन का उजाला वो रातों के सपने
मोहब्बत में क्यों सब मिटाना है तुम को

मोहब्बत ने छीनी हैं कितनों की ‘अक़्लें
मोहब्बत ने मजनूँ बनाना है तुम को

मोहब्बत नशा है सुनो इक सज़ा है
मोहब्बत ने ज़िंदा जलाना है तुम को