उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uThi thin aandhiyan jinko bujhane

उठी थीं आँधियाँ जिन को बुझाने

اٹھی تھیں آندھیاں جن کو بجھانے

शायर: Parveen Fana Syed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उठी थीं आँधियाँ जिन को बुझाने
वो शमएँ और भड़कें इस बहाने

नक़ाबें बिजलियों की रुख़ पे डाले
चमन वालों ने लौटे आशियाने

ये क्यूँ वहशत से लपका दस्त-ए-गुल-चीं
कली शायद लगी थी कुछ बताने

अभी मौहूम है सज्दे का मफ़्हूम
झुका फिर किस लिए सर कौन जाने

शुऊर-ए-ज़िंदगी की ढाल ले कर
चले हम मौत से आँखें मिलाने