उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aise lamhat bhi guzarte hain

ऐसे लम्हात भी गुज़रते हैं

ایسے لمحات بھی گزرتے ہیں

शायर: Parveen Fana Syed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐसे लम्हात भी गुज़रते हैं
जब न जीते हैं हम न मरते हैं

हम कि शाइ'र हैं दिल को ख़ूँ कर के
अपने गीतों में रंग भरते हैं

ज़िंदगी की हक़ीक़तों के गुहर
बहर-ए-अंदेशा से उभरते हैं

किस क़दर होशियार हैं हम भी
अपनी दीवानगी से डरते हैं

इक ज़रा सी ख़ुशी की चाहत में
हम ग़मों से निबाह करते हैं