उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dam-ba-KHud gulshanon ki ranai

दम-ब-ख़ुद गुलशनों की रानाई

دم بخود گلشنوں کی رعنائی

शायर: Parveen Fana Syed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दम-ब-ख़ुद गुलशनों की रानाई
कैसी खोई हुई बहार आई

तुम को सौदा-ए-महफ़िल-आराई
और हमें जुस्तुजू-ए-तन्हाई

राहतें तुम को रंज हम को अज़ीज़
अपनी अपनी नज़र की गहराई

कितनी बेगानगी से देखते हो
जब ग़म-ए-ज़िंदगी की बात आई

ज़ख़्म-दर-ज़ख़्म है हयात 'फ़ना'
कैसे कर पाओगे मसीहाई