उर्दू शायरी · ग़ज़ल

choT nai hai lekin zaKHm purana hai

चोट नई है लेकिन ज़ख़्म पुराना है

چوٹ نئی ہے لیکن زخم پرانا ہے

शायर: Parveen Fana Syed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चोट नई है लेकिन ज़ख़्म पुराना है
ये चेहरा कितना जाना-पहचाना है

सारी बस्ती चुप की धुँद में डूबी है
जिस ने लब खोले हैं वो दीवाना है

आओ उस सुक़रात का इस्तिक़बाल करें
जिस ने ज़हर के घूँट को अमृत जाना है

इक इक कर के सब पंछी दम तोड़ गए
भरी बहार में भी गुलशन वीराना है

अपना पड़ाव दश्त-ए-वफ़ा बे-आब-ओ-गियाह
तुम को तो दो चार क़दम ही जाना है

कल तक चाहत के आँचल में लिपटा था
आज वो लम्हा ख़्वाब है या अफ़साना है