उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ba-zahir ye jo begane bahut hain

ब-ज़ाहिर ये जो बेगाने बहुत हैं

بظاہر یہ جو بیگانے بہت ہیں

शायर: Parveen Fana Syed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ब-ज़ाहिर ये जो बेगाने बहुत हैं
हमारे जाने-पहचाने बहुत हैं

ख़िरद-मंदो मुबारक अज़्म-ए-अफ़्लाक
ज़मीं पर चंद दीवाने बहुत हैं

शबिस्तानों से तुम निकलो तो देखो
भरे शहरों में वीराने बहुत हैं

तुम्हारा मय-कदा तुम को मुबारक
हमें यादों के पैमाने बहुत हैं

गिला क्या ग़ैर की बेगानगी का
कि जो अपने हैं बेगाने बहुत हैं

निज़ाम-ए-ज़ीस्त का मेहवर मोहब्बत
हक़ीक़त एक अफ़्साने बहुत हैं