उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uTha ke hath na mangi gai dua humse

उठा के हाथ न माँगी गई दु'आ हम से

اٹھا کے ہاتھ نہ مانگی گئی دعا ہم سے

शायर: Qamar Siddiqui7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उठा के हाथ न माँगी गई दु'आ हम से
परिंदे ले गए उड़ने का हौसला हम से

और एक दिन उसे सच बोलना पड़ा हम से
कहाँ तलक वो भला झूट बोलता हम से

हमारे पाँव के छाले 'अज़ाब-ए-जान हुए
बस अब चला नहीं जाता बरहना-पा हम से

कभी कोई भी शिकायत न उस से की हम ने
वो इतनी बात पे बरसों रहा ख़फ़ा हम से

तनाबें ख़ेमा-ए-जाँ की उखड़ने वाली हैं
सँभालो रिश्ते को था जो भी आप का हम से

ज़बाँ तड़खने लगी इस क़दर है तिश्ना-लबी
समुंदरों का न पानी पिया गया हम से

वो आते जाते 'क़मर' को सलाम करता है
अगर है दोस्त कभी हाल पूछता हम से