उर्दू शायरी · ग़ज़ल

use har ruKH se toDa ja raha hai

उसे हर रुख़ से तोड़ा जा रहा है

اسے ہر رخ سے توڑا جا رہا ہے

शायर: Naeem Akhtar Khadimi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उसे हर रुख़ से तोड़ा जा रहा है
मगर आईना हँसता जा रहा है

हम अपने आप में सूरज हैं फिर भी
अँधेरा हम में ढूँडा जा रहा है

उसे हम ने ज़रा सा भर दिया क्या
ये साग़र तो छलकता जा रहा है

तिरे चेहरे में ऐसा क्या है आख़िर
जिसे बरसों से देखा जा रहा है

जहाँ तक मुझ से मतलब है जहाँ को
वहीं तक मुझ को पूछा जा रहा है

ज़माने पर भरोसा करने वालो
भरोसे का ज़माना जा रहा है

नजाबत जिस को छू कर भी न गुज़री
उसे सय्यद बताया जा रहा है