उर्दू शायरी · ग़ज़ल

us shoKH ke latif ishaaron ko dekhiye

उस शोख़ के लतीफ़ इशारों को देखिए

اس شوخ کے لطیف اشاروں کو دیکھیے

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस शोख़ के लतीफ़ इशारों को देखिए
बिखरे हुए हसीन नज़ारों को देखिए

हर एक शय में उस का ही जल्वा है रू-ब-रू
ये एक देखिए कि हज़ारों को देखिए

नज़रों में गर समाया है उस यार का जमाल
दर दर गली गली में निगारों को देखिए

ये किस के रंग-ओ-रूप का अक्स-ए-जमील है
छाई हुई चमन में बहारों को देखिए

नैरंगी-ए-हयात है हर सम्त जल्वा-गर
तूफ़ाँ को देखिए कि किनारों को देखिए

पर्दे उठा के आज शबिस्तान-ए-ऐश के
हाँ इक निगाह दर्द के मारों को देखिए

उल्फ़त में तेरी हार चुके हैं जो जान-ओ-दिल
अपने कभी तो सीना-फ़गारों को देखिए

क्यों उम्र-ए-मुख़्तसर को करें वक़्फ़-ए-रंज-ओ-ग़म
दम भर तो ज़िंदगी की बहारों को देखिए

दम भर कहीं थमें न ये रोके कहीं रुकें
इस क़ुल्ज़ुम-ए-हयात के धारों को देखिए

सैर-ए-चमन न यार न मुतरिब न शग़्ल-ए-मय
क्या देख कर 'हबीब' बहारों को देखिए