उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uski aankhon se ayan hai uski niyyat saf-saf

उस की आँखों से 'अयाँ है उस की निय्यत साफ़-साफ़

اس کی آنکھوں سے عیاں ہے اس کی نیت صاف صاف

शायर: Tahir Saood Kiratpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस की आँखों से 'अयाँ है उस की निय्यत साफ़-साफ़
या'नी अज़-ख़ुद तर्जुमा गो है मोहब्बत साफ़-साफ़

ऐसे आँसू उस के क़दमों में चढ़ाता हूँ मैं रोज़
मस्जिदों में जैसे दी जाती है दौलत साफ़-साफ़

मैं ने यूँ लिख दी हैं आँखें एक ना-बीना के नाम
मेरी आँखें देख सकती हैं हक़ीक़त साफ़-साफ़

दूध की हाजत है और माँ सो चुकी है मुस्तक़िल
आँसुओं को आ पड़ी पीने की नौबत साफ़-साफ़

फूल से चेहरों के दिल मुट्ठी में क़ाबू कर लिए
आँख है तो देख उर्दू की करामत साफ़-साफ़

हम उन्हें भी मान देने से नहीं करते गुरेज़
हम से अक्सर खेलते हैं जो सियासत साफ़-साफ़

कब अज़ाँ पढ़ते हैं कब तकबीर कुछ मा'लूम है
सो कहीं भी बैठ कर कुछ भी कहो मत साफ़-साफ़