उर्दू शायरी · ग़ज़ल

un ke kahne pe likh rahe hote

उन के कहने पे लिख रहे होते

ان کے کہنے پہ لکھ رہے ہوتے

शायर: Urmilesh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उन के कहने पे लिख रहे होते
हम भी कैसेट में बज रहे होते

छोड़ देते अगर ज़मीं अपनी
आसमानों में उड़ रहे होते

थोड़ी चालाकियाँ जो आ जातीं
हम फ़रिश्तों से पुज रहे होते

बेच देते जो हम ज़मीर अपना
हम भी सिक्कों में तुल रहे होते

वो तो कहिए क़लम ने रोक लिया
वर्ना कोठों पे बिक रहे होते