उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ji kar har mausam likhte hain

जी कर हर मौसम लिखते हैं

جی کر ہر موسم لکھتے ہیں

शायर: Urmilesh9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जी कर हर मौसम लिखते हैं
हाँ जी हाँ हम कम लिखते हैं

वो जो पी कर रम लिखते हैं
अक्सर अपना ग़म लिखते हैं

जिस को कोई पोंछ न पाए
उस स्याही से हम लिखते हैं

उर्दू को हिन्दी में लिख कर
अब वो ग़म को गम लिखते हैं

मैं जिस को लावा लिखता हूँ
उस को वो शबनम लिखते हैं

वो दिल में उतरे भी कैसे
जिन के सिर्फ़ क़लम लिखते हैं

लोगों की क्या वो चीख़ों को
हँस हँस कर सरगम लिखते हैं

ग़ज़लें पढ़ कर तुम लिखते हो
लेकिन कह कर हम लिखते हैं

ग़ज़लों के घायल आँगन में
वो कैसे छम-छम लिखते हैं