उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hadson par fida ho gai

हादसों पर फ़िदा हो गई

حادثوں پر فدا ہو گئی

शायर: Urmilesh7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हादसों पर फ़िदा हो गई
ज़िंदगी क्या से क्या हो गई

अब तो आँसू भी आते नहीं
दर्द की इंतिहा हो गई

फूल इतने कटीले हुए
सारी ख़ुशबू हवा हो गई

जब बुलाओ तो आती नहीं
मौत भी बेवफ़ा हो गई

एक सच हम ने क्या कह दिया
सारी दुनिया ख़फ़ा हो गई

जिस को कहते हैं हम दोस्ती
आज नक़ली दवा हो गई

कान सब के सियासी हुए
शाइ'री बे-मज़ा हो गई