उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum na urdu mein na hindi mein ghazal kahte hain

हम न उर्दू में न हिन्दी में ग़ज़ल कहते हैं

ہم نہ اردو میں نہ ہندی میں غزل کہتے ہیں

शायर: Urmilesh7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम न उर्दू में न हिन्दी में ग़ज़ल कहते हैं
हम तो बस आप की बोली में ग़ज़ल कहते हैं

वो अमीरी में ग़ज़ल कहते हैं कहते होंगे
सच्चे शा'इर तो फ़क़ीरी में ग़ज़ल कहते हैं

ऐसे शा'इर भी ग़रीबी ने किए हैं पैदा
लीडरों की जो ग़ुलामी में ग़ज़ल कहते हैं

किस को फ़ुर्सत है जो अब शे'र कहे और सुने
वही अच्छे हैं जो जल्दी में ग़ज़ल कहते हैं

अब न मस्ती है न मस्ती का सबब भी कोई
फिर भी हैरत है वो मस्ती में ग़ज़ल कहते हैं

आँखें मतला' हैं अधर जिन के हैं हुस्न-ए-मतला
उस जवानी को जवानी में ग़ज़ल कहते हैं

वो ग़ज़ल कहते हैं मा'क़ूल हवा मिलने पर
एक हम हैं कि जो आँधी में ग़ज़ल कहते हैं