उर्दू शायरी · ग़ज़ल

log jis ko gungunaen aaj ke mahaul mein

लोग जिस को गुनगुनाएँ आज के माहौल में

لوگ جس کو گنگنائیں آج کے ماحول میں

शायर: Urmilesh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लोग जिस को गुनगुनाएँ आज के माहौल में
वो ग़ज़ल कैसे सुनाएँ आज के माहौल में

चोट लगने पर भी अब आँसू निकल पाते नहीं
चुक गईं सम्वेदनाएँ आज के माहौल में

शाइ'री दफ़्तर की फ़ाइल में पड़ी हैं बंद अब
लिख रहे हैं योजनाएँ आज के माहौल में

वो जो मौलिक बात कहने का सदा आदी रहा
उस की हैं आलोचनाएँ आज के माहौल में

साप्ताहिक पत्र सी अब हो चली है हर ग़ज़ल
शे'र कहतीं सूचनाएँ आज के माहौल में