उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ummid ka charagh jala kar chala gaya

उम्मीद का चराग़ जला कर चला गया

امید کا چراغ جلا کر چلا گیا

शायर: Aadarsh Dubey5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उम्मीद का चराग़ जला कर चला गया
इक शख़्स मेरे ख़्वाब में आ कर चला गया

उस के ही दम से नक़्श-ओ-निगार-ए-बहार है
पत्थर में भी जो फूल खिला कर चला गया

दीवार की तरह मैं तिरे रास्ते में था
और रेत की तरह तू गिरा कर चला गया

आया था कौन ख़्वाब में चिंगारियाँ लिए
नींदों में मेरी आग लगा कर चला गया

यूँही नहीं हुआ हूँ मैं पत्थर मिरे अज़ीज़
आईना कोई मुझ को दिखा कर चला गया