उर्दू शायरी · ग़ज़ल

umid-e-did kaam aae na aae

उमीद-ए-दीद काम आए न आए

امید دید کام آئے نہ آئے

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb12 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उमीद-ए-दीद काम आए न आए
सहर आई है शाम आए न आए

मयस्सर है निगाह-ए-लुत्फ़-ए-साक़ी
हमें क्या दौर-ए-जाम आए न आए

शराब आँखों ही आँखों में न पी लूँ
मिरे लब तक वो जाम आए न आए

सबा करती तो है कोशिश बराबर
तिरा तर्ज़-ए-ख़िराम आए न आए

कली चटकी पहुँच जाएगी बुलबुल
सबा ले कर पयाम आए न आए

मिरे दिल में है उस का लुत्फ़-ए-गुफ़्तार
बुत-ए-शीरीं-कलाम आए न आए

सरापा पैकर-ए-तस्लीम हूँ मैं
कभी उन का सलाम आए न आए

उन्हें आती है मेरी याद अब भी
ज़बाँ पर मेरा नाम आए न आए

बना ले जावेदाँ उल्फ़त से इस को
कभी फिर ऐसी शाम आए न आए

मैं राही हूँ है चलना काम मेरा
कोई दिलकश मक़ाम आए न आए

निगाहें उन की सब कुछ कह गई हैं
कोई ले कर पयाम आए न आए

'हबीब' अहल-ए-ज़बाँ से हम-सुख़न हूँ
वो अंदाज़-ए-कलाम आए न आए