उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uljhi uljhi zulf ke KHam nachte

उलझी उलझी ज़ुल्फ़ के ख़म नाचते

الجھی الجھی زلف کے خم ناچتے

शायर: Aarif Nazeer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उलझी उलझी ज़ुल्फ़ के ख़म नाचते
तेरी महफ़िल में अगर हम नाचते

झोंक देते आग में ख़ुशियाँ तमाम
देख लेते हम अगर ग़म नाचते

दोनों हाथों से उठा कर हम फ़लक
दम दमा दम दम दमा दम नाचते

चाय की बैठक पे बैठे दो रक़ीब
अपने अपने ग़म पे बाहम नाचते

मुरशिदी का शुक्र हो जाता अदा
दीदा-ए-नम आख़िरी दम नाचते

आड़े आती है झिझक वर्ना मियाँ
नाचते 'आरिफ़' तो ऊधम नाचते