उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ujDa hua shahr phir basaun

उजड़ा हुआ शहर फिर बसाऊँ

اجڑا ہوا شہر پھر بساؤں

शायर: Parveen Fana Syed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उजड़ा हुआ शहर फिर बसाऊँ
ये हौसला अब कहाँ से लाऊँ

टूटे हुए आइने में ख़ुद को
मैं देख जो लूँ तो डर न जाऊँ

ज़ख़्मों से भरे चमन में रह कर
फूलों से महकते गीत गाऊँ

ऐ काश वफ़ा की रौशनी से
उम्मीद का इक दिया जलाऊँ

तजदीद-ए-वफ़ा के आसरे पर
ज़ख़्मों की चुभन भी भूल जाऊँ

अपना ही लहू रविश रविश पर
ऐ मेरे चमन किसे दिखाऊँ