उर्दू शायरी · ग़ज़ल

udas udas the hum usko ek zamana hua

उदास उदास थे हम उस को इक ज़माना हुआ

اداس اداس تھے ہم اس کو اک زمانہ ہوا

शायर: P P Srivastava Rind7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उदास उदास थे हम उस को इक ज़माना हुआ
ग़ज़ल का आइना देखा तो मुस्कुराना हुआ

न जाने कितने ही ख़बरों ने ख़ुद-कुशी कर ली
चलो कि आज का अख़बार भी पुराना हुआ

फिर आज बीते हुए मौसमों की याद आई
फिर आज रेंगते लम्हों से दोस्ताना हुआ

ये बंद कमरे की तन्हाइयों का ग़ुल था कि फिर
हमारे वहम पर इक वार क़ातिलाना हुआ

वो फ़ाख़्ता थी जिसे गोलियों ने भून दिया
ये क़त्ल सेहन-ए-गुलिस्ताँ में जारेहाना हुआ

हमारा शहर रहा सिर्फ़ वलवलों का ही शहर
उसे नसीब कहाँ ज़लज़ले उगाना हुआ

वो मुंहदिम सही दीवार तो मिली ऐ 'रिंद'
उसी के साए में तस्कीन का ठिकाना हुआ