उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu sitaron ke jhurmuT se aai hui mujhse mahw-e-suKHan is ada se hui

तू सितारों के झुरमुट से आई हुई मुझ से महव-ए-सुख़न इस अदा से हुई

تو ستاروں کے جھرمٹ سے آئی ہوئی مجھ سے محو سخن اس ادا سے ہوئی

शायर: Yawar Azeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू सितारों के झुरमुट से आई हुई मुझ से महव-ए-सुख़न इस अदा से हुई
जैसे हुस्न-ओ-मोहब्बत की देवी कोई आश्ना 'इश्क़ के देवता से हुई

दिल की इंदर-सभा में बड़ी देर तक उस हसीं शाम का रक़्स जारी रहा
वो जो रावी किनारे मुलाक़ात थी एक पंजाब की अप्सरा से हुई

तेरे जलवों से बढ़ कर कोई आसरा दिल ने माँगा नहीं दिल ने चाहा नहीं
हम ने दुनिया की जानिब न देखा कभी रू-ब-रू वो हमारी बला से हुई

आओ हम एक दूजे से ऐसे मिलें जिस तरह राज-हंसों का जोड़ा कोई
हम पे साया-फ़गन रहमतों की घटा आज फिर पानियों की दु'आ से हुई

तू है वा'दा-शिकन तू जफ़ा-आश्ना तू सितमगर भी है और क़ातिल भी है
मुझ पे गुज़री है जो कुछ बता दूँगा मैं जब मुलाक़ात मेरी ख़ुदा से हुई

पाँव जब चूमने के लिए मैं झुका उस ने मुझ को उठा कर जबीं चूम ली
अपनी क़िस्मत पे रश्क आ रहा है मुझे इब्तिदा ही मिरी इंतिहा से हुई

अपनी ख़ातिर जो पामाल देखा मुझे उस की आँखों से आँसू छलकने लगे
ऐसा लगता है वाक़िफ़ वो पहली दफ़'अ मेरी चाहत की इस इंतिहा से हुई