उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil waqf-e-iztirab bahut der tak raha

दिल वक़्फ़-ए-इज़्तिराब बहुत देर तक रहा

دل وقف اضطراب بہت دیر تک رہا

शायर: Yawar Azeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल वक़्फ़-ए-इज़्तिराब बहुत देर तक रहा
दर-पेश ये 'अज़ाब बहुत देर तक रहा

इक दिन उसे खुरच के कहीं ले गए ये लोग
आँखों में रंग-ए-ख़्वाब बहुत देर तक रहा

देखा जब उस ने झील के पानी में अपना 'अक्स
शो'ला ब-सत्ह-आब बहुत देर तक रहा

इस वास्ते जनाब के मैसेज न मिल सके
मौसम यहाँ ख़राब बहुत देर तक रहा

उस के दहन से ख़ास मोहब्बत रही मुझे
वो मेरा हम-लु’आब बहुत देर तक रहा

कोई तो उस में बात थी हर एक से अलग
जो शख़्स कामयाब बहुत देर तक रहा

अपनी ज़रा भी आप सफ़ाई न दे सके
औरों का एहतिसाब बहुत देर तक रहा