उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ai KHuda kyon na hua hashr ka hangam shuru

ऐ ख़ुदा क्यों न हुआ हश्र का हंगाम शुरू'

اے خدا کیوں نہ ہوا حشر کا ہنگام شروع

शायर: Yawar Azeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐ ख़ुदा क्यों न हुआ हश्र का हंगाम शुरू'
हो चुका सिलसिला-ए-ज़ुल्म सर-ए-'आम शुरू'

जब उन्हें हर्फ़-ए-मोहब्बत की ख़बर है ही नहीं
उन से कुछ सोच के कर नामा-ओ-पैग़ाम शुरू'

जी जलाएगी बहुत 'ग़ालिब'-ए-मरहूम की याद
गर्मियाँ पड़ने लगीं होने लगे आम शुरू'

ज़िंदगानी थी कि इक जादा-ए-दुश्वार-तलब
सर-ए-आग़ाज़ से थी कुल्फ़त-ए-अंजाम शुरू'

देख मैं शम'-ए-सुबुक-ताब सही ऐ ख़ुर्शीद
अब तिरा काम हुआ ख़त्म मिरा काम शुरू'

आएँ का'बे में जो उस दुश्मन-ए-ईमाँ के क़दम
बुत-परस्ती हो सर-ए-हालत-ए-एहराम शुरू'

एहतिरामन कोई दाख़िल हुआ नंगे पाँव
जब हुए शहर-ए-तमन्ना के दर-ओ-बाम शुरू'