उर्दू शायरी · ग़ज़ल

are Darte ho kyon ahl-e-muhabbat kuchh nahin hoga

अरे डरते हो क्यों अहल-ए-मुहब्बत कुछ नहीं होगा

ارے ڈرتے ہو کیوں اہل محبت کچھ نہیں ہوگا

शायर: Yawar Azeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अरे डरते हो क्यों अहल-ए-मुहब्बत कुछ नहीं होगा
नहीं आने लगी कोई क़यामत कुछ नहीं होगा

दु'आओं की हसीं छतरी तले बे-ख़ौफ़ बैठे हैं
कि टल जाएगी इक दिन हर मुसीबत कुछ नहीं होगा

मिरे होंटों पे रक्खी आग चुन लो अपने होंटों से
बस इस में चाहिए थोड़ी सी हिम्मत कुछ नहीं होगा

ब-क़ैद-ए-होश रहना तो मिरा मुमकिन नहीं यूँ भी
बना डालो मुझे तस्वीर-ए-वहशत कुछ नहीं होगा

मिरे मालिक बस इतनी सी है तुझ से इल्तिजा मेरी
'अता कर दे मुझे उस की रिफ़ाक़त कुछ नहीं होगा

रुको हम अपनी सैराबी का कुछ सामान तो कर लें
तुम्हें जाने की दे देंगे इजाज़त कुछ नहीं होगा

कोई आँचल से मुस्तग़नी हुआ बैठा है ऐ 'यावर'
उतार और फेंक दे तौक़-ए-शराफ़त कुछ नहीं होगा