उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu kisi aur se na haarega

तू किसी और से न हारेगा

تو کسی اور سے نہ ہارے گا

शायर: Naeem Akhtar Khadimi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू किसी और से न हारेगा
तुझ को तेरा ग़ुरूर मारेगा

तुझ को दस्तार जिस ने बख़्शी है
तेरा सर भी वही उतारेगा

इक ज़रा और इंतिज़ार करो
सब्र जीतेगा ज़ुल्म हारेगा

आइना तो है ख़ुद मिरी तख़्लीक़
आइना क्या मुझे सँवारेगा

उस ने जब मुझ को पाँव बख़्शे हैं
आग से भी वही गुज़ारेगा

तू उभरने का हौसला तो दिखा
ख़ुद समुंदर तुझे उभारेगा

हाँ यही अजनबी 'न'ईम' इक दिन
अपना कह कर मुझे पुकारेगा