उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhaari yaad mein kuchh yun nae mausam banata hun

तुम्हारी याद में कुछ यूँ नए मौसम बनाता हूँ

تمہاری یاد میں کچھ یوں نئے موسم بناتا ہوں

शायर: Yahya Khan Yusuf Zai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हारी याद में कुछ यूँ नए मौसम बनाता हूँ
मैं सहरा-ए-जुनूँ में रेत से शबनम बनाता हूँ

वो मुझ को ज़ख़्म देने के लिए ख़ंजर बनाते हैं
मैं उन को ठीक करने के लिए मरहम बनाता हूँ

तिरी सूरत निगाह-ओ-ज़ेहन में छाई हुई है यार
मैं सुब्ह-ओ-शाम तस्वीरों का इक एल्बम बनाता हूँ

मैं ख़ुद को रेशा रेशा फ़िक्र-ओ-फ़न से ओढ़ लेता हूँ
ग़ज़ल के शे'र की तरकीब में रेशम बनाता हूँ

ये हर्फ़-ओ-सौत की जादूगरी यूँही नहीं आती
मैं ख़ुद को सर्फ़ कर के नग़्मा-हा-ए-ग़म बनाता हूँ