उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhaari yaad ka sawan kahan se aata hai

तुम्हारी याद का सावन कहाँ से आता है

تمہاری یاد کا ساون کہاں سے آتا ہے

शायर: Ikram Arfi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हारी याद का सावन कहाँ से आता है
ये मेरी जान का दुश्मन कहाँ से आता है

शरीक-ए-जाम नहीं हूँ मगर ये सोचता हूँ
तिरा भरा हुआ बर्तन कहाँ से आता है

ये पायलें तो मिरी तब'-ज़ाद हैं लेकिन
मिरे कलाम में कंगन कहाँ से आता है

फ़लक को देख रहा हूँ सवाल करते हुए
सितारा-ए-रुख़-ए-रौशन कहाँ से आता है