उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhaara zauq hi kaamil nahin hai

तुम्हारा ज़ौक़ ही कामिल नहीं है

تمہارا ذوق ہی کامل نہیں ہے

शायर: Parveen Fana Syed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हारा ज़ौक़ ही कामिल नहीं है
वगर्ना कोई शय मुश्किल नहीं है

शरार-ए-ग़म का जो हामिल नहीं है
वो दिल सब कुछ तो है पर दिल नहीं है

जहान-ए-रंग-ओ-बू पर मिटने वालो
ये दुनिया मौज है साहिल नहीं है

बढ़े जिन के क़दम राह-ए-जुनूँ में
फिर उन की कोई भी मंज़िल नहीं है

नशात-अंगेज़ नग़्मे क्या सुनाएँ
तबीअ'त इस तरफ़ माइल नहीं है