उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum se kis ne kah diya ki KHud-kushi ke sath hain

तुम से किस ने कह दिया कि ख़ुद-कुशी के साथ हैं

تم سے کس نے کہہ دیا کہ خودکشی کے ساتھ ہیں

शायर: Ubaid Najibabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम से किस ने कह दिया कि ख़ुद-कुशी के साथ हैं
हम तो जानाँ ज़िंदगी-भर ज़िंदगी के साथ हैं

बाप के होते हुए भी जैसे हो कोई यतीम
पास में दरिया है और हम तिश्नगी के साथ हैं

हिज्र की रातों में उस ने रौशनी बख़्शी इन्हें
इस लिए ये लोग सारे चाँदनी के साथ हैं

हम को जो दिखती है दुनिया अस्ल में वो है नहीं
जिन का मज़हब तीरगी है रौशनी के साथ हैं

साथ जिस के सैकड़ों हैं साथ उस के हम नहीं
साथ जिस के हो न कोई हम उसी के साथ हैं

आज पहली मर्तबा वो छत पे तन्हा आए हैं
हाए ला'नत भेजो हम पर हम किसी के साथ हैं