उर्दू शायरी · ग़ज़ल

log dariyaon ki jhilon ki taraf dekhte hain

लोग दरियाओं की झीलों की तरफ़ देखते हैं

لوگ دریاؤں کی جھیلوں کی طرف دیکھتے ہیں

शायर: Ubaid Najibabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लोग दरियाओं की झीलों की तरफ़ देखते हैं
हम मगर आप की आँखों की तरफ़ देखते हैं

अपने हिस्से में सलीक़े का कोई ग़म ही नहीं
इस लिए इश्क़ की राहों की तरफ़ देखते हैं

आँख से अश्क निकलते हैं मु'आफ़ी बन कर
जब भी हम अपने गुनाहों की तरफ़ देखते हैं

शे'र लिक्खा नहीं जाता है 'अता होता है
बे-सबब लोग ख़यालों की तरफ़ देखते हैं

नींद आती है तो सो जाते हैं यक-दम से 'उबैद'
आँख खुलती है तो ख़्वाबों की तरफ़ देखते हैं