उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na jaane kya kahani ho rahi hai

न जाने क्या कहानी हो रही है

نہ جانے کیا کہانی ہو رہی ہے

शायर: Ubaid Najibabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न जाने क्या कहानी हो रही है
परेशाँ ज़िंदगानी हो रही है

मुसलसल हिज्र हँस कर कट रहा है
मुसलसल बे-इमानी हो रही है

उदासी से निकल आए हैं आँसू
अयाँ सोज़-ए-निहानी हो रही है

मुसाफ़िर ज़ख़्म खा कर हँस रहे हैं
ये कैसी हुक्मरानी हो रही है

उधर बेटा बिगड़ता जा रहा है
इधर बेटी सियानी हो रही है

हमें हँसते हुए देखा है जब से
पशेमाँ राएगानी हो रही है