उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jumbish-e-lab aur hai soz-e-nihani aur hai

जुम्बिश-ए-लब और है सोज़-ए-निहानी और है

جنبش لب اور ہے سوز نہانی اور ہے

शायर: Ubaid Najibabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जुम्बिश-ए-लब और है सोज़-ए-निहानी और है
उस से जो कहनी थी मुझ को वो कहानी और है

ज़िंदगी का बोझ ढोते जा रहे हैं मुस्तक़िल
और ऊपर से ये रंज-ए-राएगानी और है

इस शजर पे फल को आए इक ज़माना हो गया
डाल दो चुटकी से गर थोड़ा सा पानी और है

ज़िंदगी की मौज में हम भूल बैठे हैं सभी
ज़िंदगी के बा'द भी इक ज़िंदगानी और है

किस क़दर हालात मेरे कश्मकश में हैं 'उबैद'
दिल की धड़कन और है ख़ूँ की रवानी और है