उर्दू शायरी · ग़ज़ल

itna baDa to ho mera dalan kam se kam

इतना बड़ा तो हो मिरा दालान कम से कम

اتنا بڑا تو ہو مرا دالان کم سے کم

शायर: Ubaid Najibabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इतना बड़ा तो हो मिरा दालान कम से कम
दो-चार दिन तो रुक सकें मेहमान कम से कम

सब से कहेंगे नस्ल हैं हम 'मीर'-ओ-'फ़ैज़' की
घर में रखेंगे एक दो दीवान कम से कम

इस वास्ते भी अब के किया इश्क़ सातवाँ
इक बार तो हो फ़त्ह ये मैदान कम से कम

परचम बग़ावतों का है क्यों सब के हाथ में
कुछ तो बताओ वक़्त के सुलतान कम से कम

इन हादसों ने 'उम्र को आधा किया 'उबैद'
सौ साल वर्ना जीता था इंसान कम से कम