उर्दू शायरी · ग़ज़ल

humse jab apnon ne jhagDa kar liya

हम से जब अपनों ने झगड़ा कर लिया

ہم سے جب اپنوں نے جھگڑا کر لیا

शायर: Ubaid Najibabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम से जब अपनों ने झगड़ा कर लिया
थक के तन्हाई से साया कर लिया

सर पटकती रह गईं ख़ुद्दारियाँ
उस ने जब हाथों को कासा कर लिया

दर्द की आवाज़ तक आती नहीं
ज़ख़्म हम ने इतना गहरा कर लिया

मुफ़लिसी की कोख से पैदा हुए
इस लिए तो हँस के फ़ाक़ा कर लिया

वक़्त के पाओं में सर रख कर 'उबैद'
हम ने इस दुनिया से पर्दा कर लिया