उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum se bichhaD gae to kisi se mile na hum

तुम से बिछड़ गए तो किसी से मिले न हम

تم سے بچھڑ گئے تو کسی سے ملے نہ ہم

शायर: Qaisarul Jafri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम से बिछड़ गए तो किसी से मिले न हम
मिल भी लिए किसी से तो जी से मिले न हम

वो आँसुओं को अपनी हँसी में छुपा गया
जिस से गले मिले थे उसी से मिले न हम

बरसों के बा'द आए तो दुनिया बदल गई
अपनी गली में अपनी गली से मिले न हम

दिल को वो ग़म मिला है मोहब्बत के नाम पर
उस बेवफ़ा के बा'द किसी से मिले न हम

कुछ इस तरह से ग़म का नशा रास आ गया
आई कभी ख़ुशी तो ख़ुशी से मिले न हम

'क़ैसर' हुई न हम से दिखावे की दोस्ती
काग़ज़ के फूल ले के किसी से मिले न हम