उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum sath kya hue ki hue be-qarar log

तुम साथ क्या हुए कि हुए बे-क़रार लोग

تم ساتھ کیا ہوئے کہ ہوئے بے قرار لوگ

शायर: Onkar Gulshan8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम साथ क्या हुए कि हुए बे-क़रार लोग
मुड़-मुड़ के देखते हैं हमें बार-बार लोग

आए तो अपने साथ में लाए बहार लोग
जाने लगे तो ले गए दिल का क़रार लोग

छूटा कहाँ पे कौन किसी को ख़बर नहीं
करते नहीं किसी का यहाँ इंतिज़ार लोग

अपनाएँ किस को किस पे भरोसा करें यहाँ
जितने हमें मिले मिले बे-ए'तिबार लोग

रूदाद-ए-ग़म उन्हें तो सुनाना फ़ुज़ूल है
सुनते हैं कब किसी की हवा पर सवार लोग

यूँ अपनी ज़िंदगी को लिए फिर रहे हैं हम
जैसे कहीं ठहरते नहीं हैं फ़रार लोग

उस वक़्त एक शख़्स की होती है आँख नम
जिस वक़्त मुझ पे हँसते हैं बे-इख़्तियार लोग

'गुलशन' तमाम 'उम्र तो काँटों में काट दी
मरने के बा'द लाए हैं फूलों के हार लोग