उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kis qadar aazmane lage

किस क़दर आज़माने लगे

کس قدر آزمانے لگے

शायर: Onkar Gulshan9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किस क़दर आज़माने लगे
आप भी दिल दुखाने लगे

यूँ ख़यालों पे छाने लगे
वो ग़ज़ल बन के आने लगे

मन के आँगन में फिर दिन ढले
याद के शामियाने लगे

चार पल की मुलाक़ात को
भूलने में ज़माने लगे

तुम अगर साथ मेरे चलो
मौत दामन बचाने लगे

मेरी सूरत को क्या हो गया
आइने मुँह चिढ़ाने लगे

चल पड़ी आँधियाँ और हम
फूँस का घर बनाने लगे

अब तो आ जा ख़ुदा के लिए
लोग क्या क्या उड़ाने लगे

तुम को 'गुलशन' ये क्या हो गया
नींद में गुनगुनाने लगे