उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raaz ki baat sar-e-am na aane denge

राज़ की बात सर-ए-'आम न आने देंगे

راز کی بات سر عام نہ آنے دیں گے

शायर: Onkar Gulshan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

राज़ की बात सर-ए-'आम न आने देंगे
हम तिरे नाम पे इल्ज़ाम न आने देंगे

ये मुख़ालिफ़ मुझे आराम न आने देंगे
तेरा मुझ तक कोई पैग़ाम न आने देंगे

अपनी बर्बाद मोहब्बत के फ़साने में सनम
तेरा भूले से कहीं नाम न आने देंगे

फिर बहाने से मिरी नब्ज़ उन्हों ने देखी
वो मिरे दर्द को आराम न आने देंगे

अब सुना है कि वो इस तरह सताएँगे मुझे
अपना साया भी लब-ए-बाम न आने देंगे

छीन सकता है तो उठ छीन ले बढ़ कर 'गुलशन'
लोग हिस्से में तिरे जाम न आने देंगे