उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum nahin to malal thoDi hai

तुम नहीं तो मलाल थोड़ी है

تم نہیں تو ملال تھوڑی ہے

शायर: Tabrez Hasan Raazii8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम नहीं तो मलाल थोड़ी है
जीना मेरा मुहाल थोड़ी है

हो परेशान तो बहुत तुम भी
बस बुरा मेरा हाल थोड़ी है

जो कमाया हराम है या हलाल
हर किसी को ख़याल थोड़ी है

माँ की ख़िदमत ही जब नहीं करते
साथ रहना कमाल थोड़ी है

ये ख़ुशी मेरी 'आरज़ी है बस
मेरे ग़म का ज़वाल थोड़ी है

मात मुझ को मिली है हर शय में
हौसला पर निढाल थोड़ी है

दोस्त भी हैं गिने-चुने मेरे
सब से मिलता ख़याल थोड़ी है

हम हैं 'राज़ी' ख़ुदा के ना-फ़रमान
हम पे यूँही ज़वाल थोड़ी है